मैं अंधेरों उजालों में तुझको ढूंढ़ता हूँ,
आवाज़ दे मुझे तू ए ज़िन्दगी कहाँ है !
तारीकियों में डूबी हर एक शै है जैसे ,
चराग़ तो रोशन है मग़र रौशनी कहाँ है !!
मैं अंधेरों उजालों में तुझको ढूंढ़ता हूँ,
आवाज़ दे मुझे तू ए ज़िन्दगी कहाँ है !
तारीकियों में डूबी हर एक शै है जैसे ,
चराग़ तो रोशन है मग़र रौशनी कहाँ है !!
दिले हज़ीं में जिनका तस्सवुर है अभी तलक,
भूले से ही सही वो हमें याद तो करते होंगे !
पलकों में जो मस्तूर हैं अश्क़ दिले ज़ार के,
बन के गरदाब उनकी आँखों से गुज़रते होंगे !
चर्ख पर चमकते इस माहताब के तले,
हम सिसकते हैं तो वो भी तो जलते होंगे !
आती तो होगी याद उनको अहदे रफ्तां की,
बन संवर के जब वो घर से निकलते होंगे !
तर्के उल्फ़त से वो लगते हैं मुतमइन लेकिन,
ज़ुल्मते शब वो यकीनन पहलू तो बदलते होंगे
कोई भी हो मंज़र, मुझे बस तुम ही दिखते हो,,
नज़र ऐसी मेरी उलझी तेरी नज़रों से जा लिपटी !
कोई भी बात करता हूँ, तेरी ही बात होती है,
कोई भी बात जो निकली तेरी बातों से जा लिपटी !
मैं तुझको याद करता हूँ, तेरा ही नाम लेता हूँ ,
मेरी सांसों की हर जुम्बिश तेरी सांसों से जा लिपटी !
कोई भी ख्वाब हो मेरा, तेरा ही ख्वाब होता है ,
मेरे ख्वाबों ही कहानी तेरे ख्वाबों से जा लिपटी !
कोई भी साथ हो मेरे, तेरे ही साथ चलता हूँ ,
मेरे क़दमों की हर आहट तेरे क़दमों से जा लिपटी !