फ़ासला !!

न उधर से मेरे खत का कोई ज़वाब आया,
न इधर से कोई मैंने फिर कदम बढ़ाया !
दो पल की ख़ामुशी बनी बरसों का फ़ासला ,
न उसने कुछ कहा कभी , न मैंने बुलाया !!

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