चन्द चिट्ठियाँ और एक टूटा हुआ गुलदान रखा है !!
तेरे घर में अभी तलक मेरा कुछ सामान रखा है !!
सलामत रही ग़र ज़िन्दगी तो यक़ीनन उतार देंगे !
बहुत संभाल कर हमने तेरा एहसान रखा है!!
चन्द चिट्ठियाँ और एक टूटा हुआ गुलदान रखा है !!
तेरे घर में अभी तलक मेरा कुछ सामान रखा है !!
सलामत रही ग़र ज़िन्दगी तो यक़ीनन उतार देंगे !
बहुत संभाल कर हमने तेरा एहसान रखा है!!