इम्तिहान !!

आएंगे न लौट कर तुम किसको सदाएँ दोगे !

हम ही न रहेंगे तो फिर किसको दुआएँ दोगे !!

 

बेजान हो चुकी है कबसे ये आग़ ये तपिश !

अब राख़ को तुम कब तलक हवाएँ दोगे !!

 

शायद ये इम्तिहान है हमारे भी सब्र का !

हम भी देखेंगे तुम कितनी सज़ाएँ दोगे !!

Leave a comment