शदाई !!

मुड़ मुड़ शामां पैंदीआं ने , मुड़ मुड़ ओ तन्हाई ऐ ,

मैं आपे गल्लाँ करदा हाँ, मैनू कैंदे लोग शदाई ऐ !

मुड़ मुड़ यादाँ आँदियां ने, कदी चेता ओदा भुलदा नईं,

ओ नाल नई पर दूर वी नई, मेरा यार बड़ा हरजाई ऐ !!

समंदर

हैं मजबूत इरादे बिना तामील के बेमानी,

कागज़ की कश्ती पर समंदर पार नहीं होते !

बिना कोशिश बस ख्वाब में मिलती है मंज़िल ,

बिना गिरे तो शहसवार भी तैयार नहीं होते !

गुस्ताख़ !!

लफ़्ज़ों में लिपटा दर्द ना हो जाए बरहना,

तुम सामने हो तो कहीं कुछ बात ना निकले !

तन्हाईओं में अक्सर करते थे इस से बातें ,

डरते है ये आईना कहीं गुस्ताख़ ना निकले !!