सफ़र !!

photo of gray concrete road in the middle of jungle during daylight
Photo by Kaique Rocha on Pexels.com

हर सुब्हो शाम शोलों से गुज़रना था हमें !

हर मोड़ पर गिर गिर के संभलना था हमें !!

 

हम कहाँ जिस्म थे जो तेरे रूबरू होते !

हम रूह थे तेरे जिस्म में ढलना था हमें !!

 

क्यों हो गए मस्तूर हम अब क्या कहें तुमसे !

हम शम्स थे हर सुबह निकलना था हमें !!

 

कितने ही हिर्स आये पर कायम रहा ज़मीर !

तेरे गेसुओं में ही आकर के उलझना था हमें !!

 

कहने को हम कोहसार थे मेरे मेहबूब लेकिन !

आ कर तेरे पहलू में ही बिखरना था हमें !!

 

तेरी नज़रों में उतर कर जाना था दिल तलक !

हर हालात में तय ये सफर करना था हमें !!

 

हम थे शमा कायम रहे कुछ कर ना पाई आतिश !

आ कर के तेरे आग़ोश में ही पिघलना था हमें !!

 

हमको भी देखना था इज़्तिराब का सबब !

सहर तेरी गली से एक बार गुज़रना थे हमें !!


मस्तूर : Hidden

शम्स : Sun

हिर्स : Temptation

गेसुओं : Hair

कोहसार: Mountain

आतिश : Fire

इज़्तिराब: Unrest

8 thoughts on “सफ़र !!

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