ग़ुम !!

ऐसा नहीं कि दर्द को सहने की ताब है

महसूस कुछ होता नहीं, एहसास ग़ुम !

 

अब क्या कहूँ मैं उनसे अपनी मज़बूरी

वो सामने जब भी रहे , आवाज़ गुम !

 

जज़्बात को लफ़्ज़ों की देने लगा शक्ल

जब हाथ में आई क़लम, अल्फ़ाज़ ग़ुम !

 

तू बता इस हाल में कैसे कहूँ ग़ज़ल

मय भी है, महफ़िल भी है, साज़ ग़ुम !

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s